Central India Institute of Medical Sciences Advanced Research Centre
(CIIMS ARC)

Science Save Lives

Collaborating Centre of Excellence

Central India Institute of Medical Sciences Advanced Research Centre
(CIIMS ARC)

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Collaborating Centre of Excellence

हमारे अनुसंधान की यात्रा : समाज, मरीजों और मानवता के लिए

- पायल खुलखुले
रिसर्च ऑफिसर, CIIMS ARC, नागपुर

सीआईआईएमएस एडवांस्ड रिसर्च सेंटर (CIIMS ARC) नागपुर की यात्रा एक छोटे से इलेक्ट्रोफोरेसिस असेंबली केबिन से शुरू होकर आज चार मंज़िला भवन तक पहुँची है। यह भवन ICMR Collaborating Centre of Excellence के रूप में देश में गौरव का विषय है। हमारे लिए अनुसंधान सिर्फ़ वैज्ञानिक डेटा इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि यह एक मिशन है — समाज के अंतिम व्यक्ति की भलाई के लिए, मरीजों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए और मानवता के प्रति हमारे दायित्व के लिए।

दागिनावाला सर और डॉ. जी. एम. टाओरी सर की दूरदृष्टि

सीआईआईएमएस की इस महान यात्रा की नींव डॉ. जी. एम. टाओरी सर ने रखी। एक चिकित्सालय के रूप में शुरू हुए सीआईआईएमएस को उन्होंने अपने अद्वितीय विज़न से अनुसंधान की दिशा दी। आज भी उनके सिद्धांत — मरीजों का सम्पूर्ण उपचार, गुणवत्तापूर्ण देखभाल और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ — हमारे हर कार्य में झलकते हैं।

डॉ. टाओरी सर के इस स्वप्न को आकार देने में दागिनावाला सर की भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने अनुसंधान को CIIMS की आत्मा बनाया, ताकि हर परीक्षण, हर तकनीक और हर परियोजना मरीजों की भलाई के लिए हो।

सीआईआईएमएस हॉस्पिटल : हमारे अनुसंधान का आधार सीआईआईएमएस हॉस्पिटल नागपुर आज न केवल उन्नत चिकित्सा सुविधाओं का केन्द्र है, बल्कि यह अनुसंधान और मरीजों के उपचार का सुंदर संगम भी है। यहाँ के डॉक्टरों और कर्मचारियों की समर्पित टीम हर रोज़ यह सुनिश्चित करती है कि मरीजों को नयी तकनीकों से शीघ्र निदान और सर्वोत्तम उपचार मिले। हमारे कई अनुसंधान प्रत्यक्ष रूप से अस्पताल की डायग्नोस्टिक विंग में लागू हो रहे हैं, जिससे मरीजों को तुरन्त लाभ मिलता है।

अनुसंधान केंद्र की स्थापना और डॉ. लोकेंद्र सिंह का प्रबंधन सहयोग
सीआईआईएमएस रिसर्च लैब की नींव जब रखी गई, तब यह केवल एक छोटा सा सेमी-ऑटोमेटेड केबिन था। आज यह चार मंज़िला अत्याधुनिक अनुसंधान संस्थान है — जिसमें डायग्नोस्टिक विंग, अकादमिक विंग, क्षमता निर्माण विंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर विंग और साइंस, साइंटिस्ट एंड सोसायटी विंग शामिल हैं।

हमारी इस प्रगति में वर्तमान डायरेक्टर डॉ. लोकेंद्र सिंह और CIIMS प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका सतत प्रोत्साहन और दूरदृष्टि ही है जो हमें नए-नए प्रोजेक्ट्स, उन्नत तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं तक ले गई है।

अनुसंधान का समाज और जनजातीय स्वास्थ्य पर प्रभाव

हमारा अनुसंधान सिर्फ़ पेपर्स और जर्नल तक सीमित नहीं है। हमारे कई प्रोजेक्ट्स, जैसे मेलघाट के जनजातीय क्षेत्रों में संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, वहाँ के लोगों की जीवन शैली और स्वास्थ्य में प्रत्यक्ष सुधार ला रहे हैं।

जब हम मेलघाट की पहाड़ियों में पैदल चलते हुए ट्राइबल समुदाय के बीच सैंपलिंग करते हैं, तो हमें लगता है कि यही हमारा असली मिशन है — स्वास्थ्य सेवाएँ वहाँ तक पहुँचाना, जहाँ अक्सर चिकित्सा की पहुँच नहीं होती।

डॉ. राजपाल सिंह कश्यप : अनुसंधान के निदेशक की दूरदृष्टि

आज CIIMS ARC की यह उत्कृष्ट पहचान डॉ. राजपाल सिंह कश्यप, निदेशक अनुसंधान, के मार्गदर्शन और अथक प्रयासों का प्रतिफल है। उनका सपना है कि CIIMS ARC पूरे देश में अनुसंधान के क्षेत्र में एक मिसाल बने, और यह सपना आज सच हो रहा है।

उनकी अगुवाई में हमारा संस्थान ICMR Collaborating Centre of Excellence बना, और अब हम पूरे भारत में सबसे उत्कृष्ट प्रयोगशालाओं में गिने जाते हैं।

हम कैसे कार्य कर रहे हैं : हमारे विंग्स और परियोजनाएँ

  • डायग्नोस्टिक विंग में मरीजों के लिए उन्नत परीक्षण, NGS आधारित संक्रमणों की पहचान और फास्ट ट्रैक रिपोर्टिंग।
  • अकादमिक विंग में ICMR, DBT, DST जैसी एजेंसियों द्वारा वित्तपोषित प्रोजेक्ट्स, जिनका सीधा लाभ समाज को मिलता है।
  • क्षमता निर्माण विंग के माध्यम से युवा वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करना, ताकि देश को भावी वैज्ञानिक मिल सकें।
  • टेक्नोलॉजी ट्रांसफर विंग द्वारा इनोवेशन से आत्मनिर्भरता के लिए।
  • और साइंस, साइंटिस्ट एंड सोसायटी विंग, जिसे स्वयं मोहनजी भागवत ने उद्घाटित किया, जो अनुसंधान को आम जनता की जीवनशैली में लाने का काम करता है।

हमारी विकसित तकनीकें और चल रही परियोजनाएँ

हमने Molecular, Immunology, Microbiology, Proteomics, Bioinformatics, Animal Cell culture, point-of-care lateral flow tests, और mNGS आधारित CNS संक्रमण डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकों को विकसित किया है। हमारी चल रही परियोजनाओं में One Health फेज प्रोजेक्ट, मेलघाट जनजातीय स्वास्थ्य अध्ययन, चिकनगुनिया और स्क्रब टाइफस डायग्नोस्टिक्स जैसी कई जीवन-परिवर्तक पहलें हैं।

एक भावनात्मक प्रतिबिंब

जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं — उस छोटे इलेक्ट्रोफोरेसिस केबिन से लेकर आज की अत्याधुनिक बिल्डिंग तक — तो आँखें नम हो जाती हैं। यह यात्रा सिर्फ़ भवनों और उपकरणों की नहीं है, यह यात्रा है विश्वास, परिश्रम और सेवा की भावना की।

हमारे लिए अनुसंधान मतलब समाज की सेवा। मरीज जल्दी ठीक हों, दूरदराज के गाँवों में भी बीमारी का सही कारण पता चले, युवा वैज्ञानिकों को मंच मिले और हमारे अनुसंधान सीधे उनके जीवन को बेहतर बनाए — यही हमारा ध्येय है।

निष्कर्ष

सीआईआईएमएस एडवांस्ड रिसर्च सेंटर आज एक मिशन है। यह डॉ. जी. एम. टाओरी सर की सोच, दागिनावाला सर की निष्ठा, डॉ. लोकेंद्र सिंह के प्रबंधन और डॉ. राजपाल सिंह कश्यप की दूरदृष्टि का समन्वय है।

हमारे हर प्रयास में एक ही भावना है —विज्ञान से समाज की सेवा।

और हम गर्व से कहते हैं कि हम इस महान यात्रा के साक्षी और सहभागी हैं।

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